आज · राजकोट ठिकाण बदला
आजचे गौरी पंचांगम् रविवार, 4 ऑक्टोबर, 2026
गौरी नल्ल नेरम्: तुमच्या शहरासाठी दिवसाचे आठ आणि रात्रीचे आठ गौरी काळ, शुभ आणि अशुभ वेळांसह.
सूर्योदय . सूर्यास्त . ब्राह्म मुहूर्त to . अभिजित मुहूर्त to . यमघंट to . गुलिक काळ to . राहुकाळ to . Now: नवमी tithi, पुनर्वसू nakshatra.
रविवार, 4 ऑक्टोबर, 2026 च्या वेळा
गौरी पंचांगम् ही दक्षिण भारतीय (तमिळ) परंपरा आहे; उत्तर भारतीय पंचांगे याच उद्देशासाठी चौघडिया वापरतात.
- चांगले उत्ति · अमृत · लाभ · धन · सुख
- अशुभ रोग · चोर · विष
| # | गौरी | वेळ | स्वरूप |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्ति | to | चांगले |
| 2 | अमृत | to | चांगले |
| 3 | रोग | to | अशुभ |
| 4 | लाभ | to | चांगले |
| 5 | धन | to | चांगले |
| 6 | सुख | to | चांगले |
| 7 | चोर | to | अशुभ |
| 8 | विष | to | अशुभ |
| # | गौरी | वेळ | स्वरूप |
|---|---|---|---|
| 1 | धन | to | चांगले |
| 2 | सुख | to | चांगले |
| 3 | चोर | to | अशुभ |
| 4 | विष | to | अशुभ |
| 5 | उत्ति | to | चांगले |
| 6 | अमृत | to | चांगले |
| 7 | रोग | to | अशुभ |
| 8 | लाभ | to | चांगले |
माहिती
गौरी पंचांगम् (गौरी नल्ल नेरम्) मुख्यतः तमिळनाडू आणि दक्षिण भारताच्या इतर भागांत चांगली वेळ निवडण्यासाठी वापरले जाते. दिवस आणि रात्र प्रत्येकी आठ भागांत विभागले जातात, ज्यांची नावे उथी, अमिर्धा, रोगम्, लाभम्, धनम्, सुगम्, सोरम् आणि विषम् अशी आहेत. अमिर्धा, उथी, लाभम्, धनम् आणि सुगम् शुभ मानले जातात; रोगम्, सोरम् आणि विषम् टाळले जातात.
तुमच्या ठिकाणी दिनमान (सूर्योदय ते सूर्यास्त) आणि रात्रिमान (सूर्यास्त ते पुढचा सूर्योदय) प्रत्येकी आठ समान भागांत विभागले जातात. नावांचा क्रम वारानुसार, प्रमाणित प्रकाशित वार-तक्त्याप्रमाणे असतो.
परंपरा प्रदेश आणि पंचांग पद्धतीनुसार भिन्न असू शकतात. वेळा निवडलेल्या ठिकाण, वेळ क्षेत्र आणि गणना प्रोफाइलसाठी दाखवल्या आहेत.
या दिवसाचे संपूर्ण पंचांग
तिथी, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय आणि चंद्रोदय, सर्व शुभ आणि अशुभ काळ, पंचक, भद्रा आणि सण — तुमच्या ठिकाणासाठी.