क्लीं (कामबीज) Kleem (kāma-bīja)
परम्परा से 'कामबीज' कहलाने वाला बीजाक्षर; यह देवी और श्रीकृष्ण दोनों के मन्त्रों में आता है।
- प्रकार बीज मन्त्र
- भाषा संस्कृत
- परम्परा शाक्त
- स्रोत पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Mantra-shastra tradition
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परम्परा-विशिष्ट साधना। परंपरा के अनुसार इस मंत्र के जप के लिए गुरु-मार्गदर्शन/दीक्षा आवश्यक मानी जा सकती है। अपनी परंपरा के निर्देशों का पालन करें।
मूल पाठ
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मन्त्र
क्लींklīṃ
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
पारम्परिक सन्दर्भ
इसके सम्बन्ध परम्परा के अनुसार भिन्न हैं — शाक्त मन्त्रों (जैसे नवार्ण) में और वैष्णव कृष्ण-मन्त्रों में। इसीलिए यहाँ इसे किसी एक देवता से नहीं जोड़ा गया है।
सम्बन्धित
प्रश्न
क्लीं (कामबीज) क्या है?
परम्परा से 'कामबीज' कहलाने वाला बीजाक्षर; यह देवी और श्रीकृष्ण दोनों के मन्त्रों में आता है।
क्लीं (कामबीज) का अर्थ क्या है?
बीजाक्षर — इसका शब्द-अनुवाद नहीं होता।
क्लीं (कामबीज) का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?
इसके सम्बन्ध परम्परा के अनुसार भिन्न हैं — शाक्त मन्त्रों (जैसे नवार्ण) में और वैष्णव कृष्ण-मन्त्रों में। इसीलिए यहाँ इसे किसी एक देवता से नहीं जोड़ा गया है।
क्लीं (कामबीज) का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Mantra-shastra tradition. परम्परा: शाक्त।