अन्वेषण उपकरण
जन्म समय शोधन सहायक
जन्म समय की अनुमानित सीमा और 3 से 10 दिनांकित जीवन घटनाएँ दें। हर सम्भावित समय को उन घटनाओं के समय चल रही दशाओं के पारम्परिक कारकत्व से मिलाया जाता है।
अनुमानित, केवल अन्वेषण के लिए। यह सहायक आपका जन्म समय निश्चित नहीं कर सकता। अंक केवल यह दिखाते हैं कि कौन-से सम्भावित समय कुछ सरल पारम्परिक नियमों से मेल खाते हैं; अन्य नियम इन्हें अलग क्रम दे सकते हैं। किसी शोधित समय पर भरोसा करने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करें।
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सहायक कैसे काम करता है
- सीमा के हर सम्भावित समय का अपना लग्न और चन्द्र स्थान होता है; चन्द्र स्थान से जन्म के समय विंशोत्तरी दशा का शेष तय होता है।
- हर घटना के दिनांक (स्थानीय मध्याह्न) पर चल रहे महादशा और अन्तर्दशा के स्वामी निकाले जाते हैं।
- दशा स्वामी घटना का समर्थन करता है जब वह सम्भावित लग्न से गिने घटना के भाव का स्वामी हो, उस भाव में स्थित हो (राशि भाव), या घटना का नैसर्गिक कारक हो।
- हर समर्थक स्वामी 1 अंक जोड़ता है, इसलिए हर घटना 0 से 2 अंक पाती है। सम्भावित समय कुल अंकों के क्रम में रखे जाते हैं।
- सरलीकरण: राहु और केतु केवल स्थिति से या कारक के रूप में गिने जाते हैं; दृष्टि, वर्ग कुण्डलियाँ, योग, गोचर और माता-पिता के देहान्त के लिए मारक के पूरे नियम उपयोग नहीं होते।
| घटना | भाव (लग्न से) | कारक | स्रोत |
|---|---|---|---|
| विवाह | 7 | शुक्र | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, सप्तम (युवती) भाव; अ. 32: शुक्र जीवनसाथी का कारक |
| सन्तान का जन्म | 5 | गुरु | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, पंचम (सुत) भाव; अ. 32: गुरु सन्तान का कारक |
| करियर का आरम्भ | 10 | — | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, दशम (कर्म) भाव; दशम के कारक ग्रन्थों में भिन्न हैं, इसलिए कोई कारक नहीं लिया गया |
| करियर में परिवर्तन | 10 | — | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, दशम (कर्म) भाव; दशम के कारक ग्रन्थों में भिन्न हैं, इसलिए कोई कारक नहीं लिया गया |
| स्थान परिवर्तन | 4, 12 | — | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, चतुर्थ (सुख) भाव: निवास; द्वादश (व्यय) भाव: दूर निवास |
| पिता का देहान्त | 9 | सूर्य | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, नवम भाव: पिता; अ. 32: सूर्य पिता का कारक |
| माता का देहान्त | 4 | चन्द्र | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, चतुर्थ भाव: माता; अ. 32: चन्द्र माता का कारक |
| गम्भीर रोग | 6, 8 | — | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, षष्ठ (अरि) भाव: रोग; अष्टम (रन्ध्र) भाव |
जन्म समय शोधन की विधियाँ परम्पराओं में बहुत भिन्न हैं (दशा, गोचर, वर्ग कुण्डली, कुण्ड, प्राणपद आदि)। यह पृष्ठ केवल ऊपर बताई गई सरल दशा-कारकत्व जाँच करता है।