यात्रा · दिशा व समय

यात्रा मुहूर्त शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

आज का दिशा शूल (त्याज्य दिशा), उसका पारम्परिक परिहार, और चौघड़िया, होरा व राहु काल से यात्रा आरम्भ के अच्छे समय।

नई दिल्ली, Delhi, India 28.6214°, 77.2148° Asia/Kolkata (UTC+05:30) उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित)

शनिवार का दिशा शूलपूर्वइस दिशा में यात्रा आरम्भ न करें
परिहार (यदि यात्रा टल न सके)उड़द
राहु काल –
श्रेष्ठ होरा खण्ड9

यात्रा आरम्भ के अच्छे समय

यात्रा आरम्भ के अच्छे समय
समयचौघड़ियाइस समय में होरा
–
दिन
शुभ
  • – गुरु श्रेष्ठ
  • – मंगल
–
दिन
चर
  • – चन्द्र श्रेष्ठ
  • – शनि
–
दिन
लाभ
  • – शनि
  • – गुरु श्रेष्ठ
–
दिन
अमृत
  • – मंगल
  • – सूर्य
–
रात्रि
लाभ
  • – बुध श्रेष्ठ
  • – चन्द्र श्रेष्ठ
–
रात्रि
शुभ
  • – गुरु श्रेष्ठ
  • – मंगल
–
रात्रि
अमृत
  • – मंगल
  • – सूर्य
–
रात्रि
चर
  • – शुक्र श्रेष्ठ
  • – बुध श्रेष्ठ
–
रात्रि
लाभ
  • – गुरु श्रेष्ठ
  • – मंगल

हिन्दू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक; आधी रात के बाद के समय पर (+1) लिखा है।

वार अनुसार दिशा शूल

वार अनुसार दिशा शूल
वारदिशा शूलपरिहार (यदि यात्रा टल न सके)
रविवार पश्चिमघी
सोमवार पूर्वदूध
मंगलवार उत्तरगुड़
बुधवार उत्तरतिल
गुरुवार दक्षिणदही
शुक्रवार पश्चिमजौ
शनिवार पूर्वउड़द

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है, इसलिए सूर्योदय से पहले पिछले वार का दिशा शूल लागू होता है।

प्रयुक्त नियम

  1. दिन और रात के अमृत, शुभ व लाभ (शुभ चौघड़िया) तथा चर (चल) चौघड़िया लें — चर चौघड़िया परम्परा से यात्रा के लिए उत्तम माना जाता है।
  2. जो भाग राहु काल में पड़े उसे हटा दें।
  3. शेष समय में जिन घंटों का होरा स्वामी नैसर्गिक शुभ ग्रह (चन्द्र, बुध, गुरु या शुक्र) हो, उन्हें श्रेष्ठ चिह्नित करें।
  4. यदि यात्रा उस दिन की दिशा शूल वाली दिशा में है तो यात्रा आरम्भ न करें या परिहार करें।

दिशा शूल सारणी: घाघ-भड्डरी की कहावत — सोम व शनिवार पूर्व, मंगल व बुधवार उत्तर, रवि व शुक्रवार पश्चिम, गुरुवार दक्षिण। परिहार पंचांगों में सामान्यतः दी गई सूची के अनुसार: रविवार घी, सोमवार दूध, मंगलवार गुड़, बुधवार तिल, गुरुवार दही, शुक्रवार जौ, शनिवार उड़द।

भिन्नताएँ: कुछ पंचांग हर वार के लिए एक विदिशा (कोण दिशा) या नक्षत्र शूल (जैसे ज्येष्ठा पूर्व, रोहिणी पश्चिम, पूर्वा भाद्रपद दक्षिण) भी देते हैं; परिहार की सूचियाँ भी भिन्न हैं (जैसे रविवार दलिया, सोमवार दर्पण में मुख देखना, बुधवार धनिया, शनिवार अदरक)। ये यहाँ लागू नहीं किए गए हैं।

परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।

इस दिन का पूरा चौघड़िया