आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 2.50

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte |

तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam ||

अर्थ

समबुद्धि वाला व्यक्ति यहीं पुण्य और पाप दोनों से मुक्त हो जाता है। इसलिए योग में लगो; कर्मों में कुशलता ही योग है।

One whose understanding is steady leaves behind both good and bad deeds here. So devote yourself to yoga: yoga is skill in action.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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