वक्री और अस्त ग्रह पंचांग 2026
पूरे वर्ष में बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि कब वक्री और मार्गी होते हैं, और कब अस्त (सूर्य के बहुत निकट) रहते हैं।
एक नज़र में पूरा वर्ष
बुध
वक्री
| वक्री होता है | मार्गी होता है | अवधि |
|---|---|---|
कुम्भ 28°20'12" | कुम्भ 14°15'43" | 23 दिन |
कर्क 2°01'29" | मिथुन 22°04'59" | 24 दिन |
तुला 26°44'31" | तुला 10°47'43" | 20 दिन |
अस्त
| से | तक | अवधि |
|---|---|---|
| 44 दिन | ||
इस अवधि में वक्री | 13 दिन | |
| 25 दिन | ||
इस अवधि में वक्री | 16 दिन | |
| 31 दिन | ||
इस अवधि में वक्री | 11 दिन | |
| 48 दिन |
शुक्र अभी वक्री
वक्री
| वक्री होता है | मार्गी होता है | अवधि |
|---|---|---|
तुला 14°14'59" | कन्या 28°37'20" | 42 दिन |
अस्त
| से | तक | अवधि |
|---|---|---|
| 83 दिन | ||
इस अवधि में वक्री | 10 दिन |
मंगल
वक्री
इस वर्ष कोई वक्री काल नहीं।
अस्त
| से | तक | अवधि |
|---|---|---|
| 140 दिन |
गुरु
वक्री
| वक्री होता है | मार्गी होता है | अवधि |
|---|---|---|
कर्क 0°55'38" | मिथुन 20°51'28" | 119 दिन |
सिंह 2°47'04" | कर्क 22°45'05" | 121 दिन |
अस्त
| से | तक | अवधि |
|---|---|---|
| 30 दिन |
शनि अभी वक्री
वक्री
| वक्री होता है | मार्गी होता है | अवधि |
|---|---|---|
मीन 20°30'47" | मीन 13°41'19" | 137 दिन |
अस्त
| से | तक | अवधि |
|---|---|---|
| 35 दिन |
परिचय
जब पृथ्वी से देखने पर कोई ग्रह कुछ समय के लिए राशिचक्र में पीछे की ओर चलता दिखता है, तो उसे वक्री कहते हैं। जब वह सूर्य के इतना निकट होता है कि उसकी चमक में छिप जाता है, तो उसे अस्त कहते हैं। मुहूर्त और कुंडली विचार दोनों में इन अवस्थाओं का प्रयोग होता है।
वक्री और मार्गी होने के क्षण वे हैं जब भूकेंद्रीय भोगांश में ग्रह की दैनिक गति का चिह्न बदलता है; इन्हें दिन-प्रतिदिन खोजकर मिनट तक परिष्कृत किया जाता है। जो काल वर्ष के बाहर शुरू या समाप्त होता है, वह पूरा दिखाया गया है।
अस्त के अंश (भोगांश में सूर्य से दूरी), सूर्य सिद्धांत के मान जैसा द्रिक पद्धति के पंचांग प्रयोग करते हैं: चंद्र 12°, मंगल 17°, बुध 14° (वक्री होने पर 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री होने पर 8°), शनि 15°। कुछ ग्रंथ अन्य अंश मानते हैं।
मुहूर्त में गुरु और शुक्र के अस्त के लिए दूसरा नियम प्रयुक्त होता है: आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग का उसके केंद्रीय स्थान पर उदय-अस्त नियम (ग्रह तब अस्त है जब सूर्योदय से पहले उसके उदय पर और सूर्यास्त के बाद उसके अस्त पर, दोनों समय सूर्य क्षितिज से गुरु के लिए 8.5° और शुक्र के लिए 6° से कम नीचे हो)। इसलिए उसकी तिथियाँ यहाँ दिखाए गए अस्त से कुछ दिन, शुक्र के लिए लगभग दो सप्ताह तक, भिन्न हो सकती हैं।
समय Asia/Kolkata में है। ग्रहों की स्थिति आपके शहर पर नहीं, केवल समय क्षेत्र पर निर्भर करती है।
प्रोफ़ाइल: उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित); अयनांश: लाहिरी (समायोजित); राहु/केतु: मध्यम पात।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।