ॐ (प्रणव) Om (Pranava)
पवित्र अक्षर ॐ, जिससे वेद-पाठ और अधिकांश मन्त्रों का आरम्भ और समापन होता है।
- प्रकार बीज मन्त्र
- भाषा संस्कृत
- परम्परा अनेक परम्पराओं में प्रचलित
- स्रोत माण्डूक्य उपनिषद् — Mandukya Upanishad
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मूल पाठ
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मन्त्र
ॐoṃ
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
पारम्परिक सन्दर्भ
माण्डूक्य उपनिषद् ॐ को अ-उ-म् और उसके बाद के मौन के रूप में समझाता है, जो जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और चतुर्थ अवस्था (तुरीय) के अनुरूप हैं। यह सभी हिन्दू परम्पराओं में समान है।
प्रश्न
ॐ (प्रणव) क्या है?
पवित्र अक्षर ॐ, जिससे वेद-पाठ और अधिकांश मन्त्रों का आरम्भ और समापन होता है।
ॐ (प्रणव) का अर्थ क्या है?
प्रणव — ब्रह्म का नाद-प्रतीक।
ॐ (प्रणव) का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?
माण्डूक्य उपनिषद् ॐ को अ-उ-म् और उसके बाद के मौन के रूप में समझाता है, जो जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और चतुर्थ अवस्था (तुरीय) के अनुरूप हैं। यह सभी हिन्दू परम्पराओं में समान है।
ॐ (प्रणव) का स्रोत क्या है?
माण्डूक्य उपनिषद् — Mandukya Upanishad. परम्परा: अनेक परम्पराओं में प्रचलित।
ॐ (प्रणव) का उच्चारण कैसे करें?
प्रायः दीर्घ 'ओ' के बाद गुंजन करते 'म्' के रूप में उच्चारित।