बीज मन्त्र · माँ लक्ष्मी

श्रीं (लक्ष्मी बीज) Shreem (bija of Lakshmi)

परम्परा से लक्ष्मी से जुड़ा बीजाक्षर (श्रीबीज)।

परम्परा-विशिष्ट पाठ सम्पादकीय जाँच

मार्गदर्शन-सूचना। कुछ परम्पराओं के अनुसार बीज मन्त्रों का अभ्यास योग्य गुरु के मार्गदर्शन में होना चाहिए। अपनी परंपरा के निर्देशों का पालन करें।

जप आरम्भ करें PDF

मूल पाठ

मन्त्र

श्रींśrīṃ

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

पारम्परिक सन्दर्भ

बीज प्रायः पूरे मन्त्र के भीतर जपे जाते हैं (जैसे ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः)।

सम्बन्धित

माँ लक्ष्मी के और पाठ

प्रश्न

श्रीं (लक्ष्मी बीज) क्या है?

परम्परा से लक्ष्मी से जुड़ा बीजाक्षर (श्रीबीज)।

श्रीं (लक्ष्मी बीज) किस देवता से जुड़ा है?

श्रीं (लक्ष्मी बीज) माँ लक्ष्मी से जुड़ा है। समृद्धि, कल्याण और शुभता की देवी, भगवान विष्णु की अर्धांगिनी; दीपावली और शुक्रवार को विशेष रूप से पूजित।

श्रीं (लक्ष्मी बीज) का अर्थ क्या है?

बीजाक्षर — इसका शब्द-अनुवाद नहीं होता। परम्परा से लक्ष्मी से सम्बद्ध।

श्रीं (लक्ष्मी बीज) का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?

बीज प्रायः पूरे मन्त्र के भीतर जपे जाते हैं (जैसे ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः)।

श्रीं (लक्ष्मी बीज) का स्रोत क्या है?

पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Mantra-shastra tradition. परम्परा: शाक्त।

व्हाट्सऐप