बीज मन्त्र · शुक्र देव

शुक्र बीज मन्त्र Shukra Beej Mantra

ज्योतिष परम्परा में प्रयुक्त शुक्र का प्रचलित त्रि-बीज मन्त्र।

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मार्गदर्शन-सूचना। कुछ परम्पराओं के अनुसार बीज मन्त्रों का अभ्यास योग्य गुरु के मार्गदर्शन में होना चाहिए। अपनी परंपरा के निर्देशों का पालन करें।

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मूल पाठ

मन्त्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ॥oṃ drāṃ drīṃ drauṃ saḥ śukrāya namaḥ ||

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

पारम्परिक सन्दर्भ

ग्रह बीज मन्त्र परंपरागत ज्योतिषीय उपायों में गिने जाते हैं। कुछ ज्योतिष परम्पराएँ कुण्डली में निर्बल या पीड़ित माने गए ग्रह के लिए इनके जप को जोड़ती हैं। यह परम्परागत प्रथा है; किसी परिणाम की गारण्टी नहीं है।

सम्बन्धित

इन्हीं अवसरों के लिए

प्रश्न

शुक्र बीज मन्त्र क्या है?

ज्योतिष परम्परा में प्रयुक्त शुक्र का प्रचलित त्रि-बीज मन्त्र।

शुक्र बीज मन्त्र किस देवता से जुड़ा है?

शुक्र बीज मन्त्र शुक्र देव से जुड़ा है। दैत्यगुरु शुक्र, नवग्रहों में; शुक्रवार उनका दिन है।

शुक्र बीज मन्त्र का अर्थ क्या है?

ॐ, (बीज द्रां द्रीं द्रौं सः) — शुक्र को नमस्कार।

शुक्र बीज मन्त्र का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?

ग्रह बीज मन्त्र परंपरागत ज्योतिषीय उपायों में गिने जाते हैं। कुछ ज्योतिष परम्पराएँ कुण्डली में निर्बल या पीड़ित माने गए ग्रह के लिए इनके जप को जोड़ती हैं। यह परम्परागत प्रथा है; किसी परिणाम की गारण्टी नहीं है।

शुक्र बीज मन्त्र का स्रोत क्या है?

पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Commonly printed in Jyotish and graha-shanti manuals. परम्परा: अनेक परम्पराओं में प्रचलित।

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