पंचांग · भद्रा (विष्टि करण)

भद्रा (विष्टि करण) का समय

अगले 30 दिनों की भद्रा, आरम्भ के समय भद्रा का वास और अवधि के दौरान होने वाले परिवर्तन सहित।

लखनऊ, Uttar Pradesh, India 26.8393°, 80.9231° Asia/Kolkata (UTC+05:30) उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित)

इस समयअभी नहीं
अगला प्रारम्भ08/10/2026 (गुरु), 2 दिन बाद
30 दिनों में अवधियाँ9

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 से बुधवार, 4 नवंबर 2026 तक

गणना से प्राप्त तथ्य

भद्रा विष्टि करण है। करण तिथि का आधा भाग (चन्द्र–सूर्य अन्तर के 6°) होता है, और विष्टि एक चान्द्र मास में लगभग आठ बार आता है। आरम्भ और समाप्ति का समय चुने गए स्थान के समय क्षेत्र के अनुसार खगोलीय गणना से निकाला गया है।

  1. प्रारम्भ05/10/2026 (सोम)
    समाप्ति06/10/2026 (मंगल)
    11 घं 8 मिवास: भूलोक (पृथ्वी)
  2. प्रारम्भ08/10/2026 (गुरु)
    समाप्ति09/10/2026 (शुक्र)
    11 घं 37 मिवास: भूलोक (पृथ्वी)बदलकर पाताल से
  3. प्रारम्भ14/10/2026 (बुध)
    समाप्ति15/10/2026 (गुरु)
    12 घं 56 मिवास: स्वर्ग
  4. प्रारम्भ18/10/2026 (रवि)
    समाप्ति18/10/2026 (रवि)
    13 घं 14 मिवास: पाताल
  5. प्रारम्भ22/10/2026 (गुरु)
    समाप्ति22/10/2026 (गुरु)
    12 घं 12 मिवास: भूलोक (पृथ्वी)
  6. प्रारम्भ25/10/2026 (रवि)
    समाप्ति25/10/2026 (रवि)
    10 घं 56 मिवास: भूलोक (पृथ्वी)बदलकर स्वर्ग से
  7. प्रारम्भ28/10/2026 (बुध)
    समाप्ति29/10/2026 (गुरु)
    10 घं 30 मिवास: स्वर्ग
  8. प्रारम्भ31/10/2026 (शनि)
    समाप्ति01/11/2026 (रवि)
    10 घं 54 मिवास: स्वर्गबदलकर भूलोक (पृथ्वी) से
  9. प्रारम्भ03/11/2026 (मंगल)
    समाप्ति04/11/2026 (बुध)
    11 घं 37 मिवास: भूलोक (पृथ्वी)

पारम्परिक व्याख्या

परम्परा के अनुसार चन्द्रमा कर्क, सिंह, कुम्भ या मीन में हो तो भद्रा का वास भूलोक (पृथ्वी) पर, मेष, वृषभ, मिथुन या वृश्चिक में हो तो स्वर्ग में, और कन्या, तुला, धनु या मकर में हो तो पाताल में माना जाता है। पृथ्वी पर वास करने वाली भद्रा को सामान्यतः सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

भद्रा विष्टि करण है (गणना द्वारा निकाला गया अर्ध-तिथि काल)। अनेक परम्पराएँ भद्रा में, विशेषकर भूलोक वास (चन्द्रमा कर्क, सिंह, कुम्भ या मीन में) होने पर, शुभ कार्य आरम्भ नहीं करतीं; कुछ स्वर्ग या पाताल वास में कार्य की अनुमति देती हैं।

जिन त्योहारों के नियम में भद्रा वर्जित है, जैसे रक्षा बन्धन और होलिका दहन, उनके पृष्ठों पर समय अवधि स्वतः भद्रा रहित दिखाई जाती है।

परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।

व्रत, एकादशी, श्राद्ध, संक्रान्ति और ध्यान रखने योग्य काल — सब आपके स्थान के लिए गणित।