श्री काली चालीसा Shri Kali Chalisa
माँ काली की पचपन चौपाइयाँ, जिनमें उनके अनेक रूपों, महाविद्याओं और नवदुर्गाओं के नाम हैं।
- देवता माँ काली
- प्रकार चालीसा
- भाषा हिन्दी
- परम्परा शाक्त
- स्रोत 51 चालीसा संग्रह (आरतियों सहित) — रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (2004) — Scan pages 205–209
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दोहा
जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज ।jay kālī jagadamba jay, harani ogh agh puṃj |
वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज ॥vās karahu nij dās ke, niśadin hṛday nikuṃj ||
दोहा
जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि ।jayati kapālī kālikā, kaṃkālī sukh dāni |
कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि ॥kṛpā karahu varadāyinī, nij sevak anumāni ||
चौपाई 1
जय जय जय काली कंकाली ।jay jay jay kālī kaṃkālī |
जय कपालिनी जयति कराली ॥ १ ॥jay kapālinī jayati karālī || 1 ||
चौपाई 2
शंकर प्रिया अपर्णा अम्बा ।śaṃkar priyā aparṇā ambā |
जय कपर्दिनी जय जगदम्बा ॥ २ ॥jay kapardinī jay jagadambā || 2 ||
चौपाई 3
आर्या हला अम्बिका माया ।āryā halā ambikā māyā |
कात्यायनी उमा जगजाया ॥ ३ ॥kātyāyanī umā jagajāyā || 3 ||
चौपाई 4
गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी ।girijā gaurī durgā caṇḍī |
दाक्षायणी शाम्भवी प्रचंडी ॥ ४ ॥dākṣāyaṇī śāmbhavī pracaṃḍī || 4 ||
चौपाई 5
पार्वती मंगला भवानी ।pārvatī maṃgalā bhavānī |
विश्वकारिणी सती मृडानी ॥ ५ ॥viśvakāriṇī satī mṛḍānī || 5 ||
चौपाई 6
सर्वमंगला शैल नन्दिनी ।sarvamaṃgalā śail nandinī |
हेमवती तुम जगत वन्दिनी ॥ ६ ॥hemavatī tum jagat vandinī || 6 ||
चौपाई 7
ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय ।brahmacāriṇī kālarātri jay |
महारात्रि जय मोहरात्रि जय ॥ ७ ॥mahārātri jay moharātri jay || 7 ||
चौपाई 8
तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका ।tum trimūrti rohiṇī kālikā |
कूष्माण्डा कार्तिकी चण्डिका ॥ ८ ॥kūṣmāṇḍā kārtikī caṇḍikā || 8 ||
चौपाई 9
तारा भुवनेश्वरी अनन्या ।tārā bhuvaneśvarī ananyā |
तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या ॥ ९ ॥tumhīṃ chinnamastā śucidhanyā || 9 ||
चौपाई 10
धूमावती षोडशी माता ।dhūmāvatī ṣoḍaśī mātā |
बगला मातंगी विख्याता ॥ १० ॥bagalā mātaṃgī vikhyātā || 10 ||
चौपाई 11
तुम भैरवी मातु तुम कमला ।tum bhairavī mātu tum kamalā |
रक्तदन्तिका कीरति अमला ॥ ११ ॥raktadantikā kīrati amalā || 11 ||
चौपाई 12
शाकम्भरी कौशिकी भीमा ।śākambharī kauśikī bhīmā |
महातमा अग जग की सीमा ॥ १२ ॥mahātamā ag jag kī sīmā || 12 ||
चौपाई 13
चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री ।candraghaṇṭikā tum sāvitrī |
ब्रह्मवादिनी मां गायत्री ॥ १३ ॥brahmavādinī māṃ gāyatrī || 13 ||
चौपाई 14
रूद्राणी तुम कृष्ण पिंगला ।rūdrāṇī tum kṛṣṇa piṃgalā |
अग्निज्वाल तुम सर्वमंगला ॥ १४ ॥agnijvāl tum sarvamaṃgalā || 14 ||
चौपाई 15
मेघस्वना तपस्विनि योगिनी ।meghasvanā tapasvini yoginī |
सहस्त्राक्षि तुम अगजग भोगिनी ॥ १५ ॥sahastrākṣi tum agajag bhoginī || 15 ||
चौपाई 16
जलोदरी सरस्वती डाकिनी ।jalodarī sarasvatī ḍākinī |
त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी ॥ १६ ॥tridaśeśvarī ajey lākinī || 16 ||
चौपाई 17
पुष्टि तुष्टि धृति स्मृति शिव दूती ।puṣṭi tuṣṭi dhṛti smṛti śiv dūtī |
कामाक्षी लज्जा आहूती ॥ १७ ॥kāmākṣī lajjā āhūtī || 17 ||
चौपाई 18
महोदरी कामाक्षि हारिणी ।mahodarī kāmākṣi hāriṇī |
विनायकी श्रुति महा शाकिनी ॥ १८ ॥vināyakī śruti mahā śākinī || 18 ||
चौपाई 19
अजा कर्ममोही ब्रह्माणी ।ajā karmamohī brahmāṇī |
धात्री वाराही शर्वाणी ॥ १९ ॥dhātrī vārāhī śarvāṇī || 19 ||
चौपाई 20
स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी ।skanda mātu tum siṃh vāhinī |
मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी ॥ २० ॥mātu subhadrā rahahu dāhinī || 20 ||
चौपाई 21
नाम रूप गुण अमित तुम्हारे ।nām rūp guṇ amit tumhāre |
शेष शारदा बरणत हारे ॥ २१ ॥śeṣ śāradā baraṇat hāre || 21 ||
चौपाई 22
तनु छवि श्यामवर्ण तव माता ।tanu chavi śyāmavarṇa tav mātā |
नाम कालिका जग विख्याता ॥ २२ ॥nām kālikā jag vikhyātā || 22 ||
चौपाई 23
अष्टादश तब भुजा मनोहर ।aṣṭādaś tab bhujā manohar |
तिनमहँ अस्त्र विराजत सुन्दर ॥ २३ ॥tinamaham̐ astra virājat sundar || 23 ||
चौपाई 24
शंख चक्र अरू गदा सुहावन ।śaṃkh cakra arū gadā suhāvan |
परिघ भुशण्डी घण्टा पावन ॥ २४ ॥parigh bhuśaṇḍī ghaṇṭā pāvan || 24 ||
चौपाई 25
शूल बज्र धनुबाण उठाये ।śūl bajra dhanubāṇ uṭhāye |
निशिचर कुल सब मारि गिराये ॥ २५ ॥niśicar kul sab māri girāye || 25 ||
चौपाई 26
शुंभ निशुंभ दैत्य संहारे ।śuṃbh niśuṃbh daitya saṃhāre |
रक्तबीज के प्राण निकारे ॥ २६ ॥raktabīj ke prāṇ nikāre || 26 ||
चौपाई 27
चौंसठ योगिनी नाचत संगा ।cauṃsaṭh yoginī nācat saṃgā |
मद्यपान कीन्हैउ रण गंगा ॥ २७ ॥madyapān kīnhaiu raṇ gaṃgā || 27 ||
चौपाई 28
कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि ।kaṭi kiṃkiṇī madhur nūpur dhuni |
दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि सुनि ॥ २८ ॥daityavaṃś kāṃpat jehi suni suni || 28 ||
चौपाई 29
कर खप्पर त्रिशूल भयकारी ।kar khappar triśūl bhayakārī |
अहै सदा सन्तन सुखकारी ॥ २९ ॥ahai sadā santan sukhakārī || 29 ||
चौपाई 30
शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा ।śav ārūṛh nṛtya tum sājā |
बजत मृदंग भेरी के बाजा ॥ ३० ॥bajat mṛdaṃg bherī ke bājā || 30 ||
चौपाई 31
रक्त पान अरिदल को कीन्हा ।rakta pān aridal ko kīnhā |
प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा ॥ ३१ ॥prāṇ tajeu jo tumhiṃ na cīnhā || 31 ||
चौपाई 32
लपलपाति जिव्हा तव माता ।lapalapāti jivhā tav mātā |
भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता ॥ ३२ ॥bhaktan sukh duṣṭan duḥkh dātā || 32 ||
चौपाई 33
लसत भाल सेंदुर को टीको ।lasat bhāl seṃdur ko ṭīko |
बिखरे केश रूप अति नीको ॥ ३३ ॥bikhare keś rūp ati nīko || 33 ||
चौपाई 34
मुंडमाल गल अतिशय सोहत ।muṃḍamāl gal atiśay sohat |
भुजामाल किंकण मनमोहत ॥ ३४ ॥bhujāmāl kiṃkaṇ manamohat || 34 ||
चौपाई 35
प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी ।pralay nṛtya tum karahu bhavānī |
जगदम्बा कहि वेद बखानी ॥ ३५ ॥jagadambā kahi ved bakhānī || 35 ||
चौपाई 36
तुम मशान वासिनी कराला ।tum maśān vāsinī karālā |
भजत तुरत काटहु भवजाला ॥ ३६ ॥bhajat turat kāṭahu bhavajālā || 36 ||
चौपाई 37
बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर ।bāvan śakti pīṭh tav sundar |
जहाँ बिराजत विविध रूप धर ॥ ३७ ॥jahām̐ birājat vividh rūp dhar || 37 ||
चौपाई 38
विन्ध्यवासिनी कहूँ बड़ाई ।vindhyavāsinī kahūm̐ baṛāī |
कहँ कालिका रूप सुहाई ॥ ३८ ॥kaham̐ kālikā rūp suhāī || 38 ||
चौपाई 39
शाकम्भरी बनी कहँ ज्वाला ।śākambharī banī kaham̐ jvālā |
महिषासुर मर्दिनी कराला ॥ ३९ ॥mahiṣāsur mardinī karālā || 39 ||
चौपाई 40
कामाख्या तव नाम मनोहर ।kāmākhyā tav nām manohar |
पुजवहिं मनोकामना द्रुततर ॥ ४० ॥pujavahiṃ manokāmanā drutatar || 40 ||
चौपाई 41
चंड मुंड वध छिन महं करेउ ।caṃḍ muṃḍ vadh chin mahaṃ kareu |
देवन के उर आनन्द भरेउ ॥ ४१ ॥devan ke ur ānanda bhareu || 41 ||
चौपाई 42
सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा ।sarva vyāpinī tum mām̐ tārā |
अरिदल दलन लेहु अवतारा ॥ ४२ ॥aridal dalan lehu avatārā || 42 ||
चौपाई 43
खलबल मचत सुनत हुँकारी ।khalabal macat sunat hum̐kārī |
अगजग व्यापक देह तुम्हारी ॥ ४३ ॥agajag vyāpak deh tumhārī || 43 ||
चौपाई 44
तुम विराट रूपा गुणखानी ।tum virāṭ rūpā guṇakhānī |
विश्व स्वरूपा तुम महारानी ॥ ४४ ॥viśva svarūpā tum mahārānī || 44 ||
चौपाई 45
उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण ।utpatti sthiti lay tumhare kāraṇ |
करहु दास के दोष निवारण ॥ ४५ ॥karahu dās ke doṣ nivāraṇ || 45 ||
चौपाई 46
माँ उर वास करहू तुम अंबा ।mām̐ ur vās karahū tum aṃbā |
सदा दीन जन की अवलंबा ॥ ४६ ॥sadā dīn jan kī avalaṃbā || 46 ||
चौपाई 47
तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई ।tumhāro dhyān dharai jo koī |
ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई ॥ ४७ ॥tā kaham̐ bhīti katahum̐ nahiṃ hoī || 47 ||
चौपाई 48
विश्वरूप तुम आदि भवानी ।viśvarūp tum ādi bhavānī |
महिमा वेद पुराण बखानी ॥ ४८ ॥mahimā ved purāṇ bakhānī || 48 ||
चौपाई 49
अति अपार तव नाम प्रभावा ।ati apār tav nām prabhāvā |
जपत न रहन रंच दुःख दावा ॥ ४९ ॥japat na rahan raṃc duḥkh dāvā || 49 ||
चौपाई 50
महाकालिका जय कल्याणी ।mahākālikā jay kalyāṇī |
जयति सदा सेवक सुखदानी ॥ ५० ॥jayati sadā sevak sukhadānī || 50 ||
चौपाई 51
तुम अनन्त औदार्य विभूषण ।tum ananta audārya vibhūṣaṇ |
कीजिये कृपा क्षमिये सब दूषण ॥ ५१ ॥kījiye kṛpā kṣamiye sab dūṣaṇ || 51 ||
चौपाई 52
दास जानि निज दया दिखावहु ।dās jāni nij dayā dikhāvahu |
सुत अनुमानित सहित अपनावहु ॥ ५२ ॥sut anumānit sahit apanāvahu || 52 ||
चौपाई 53
जननी तुम सेवक प्रति पाली ।jananī tum sevak prati pālī |
करहु कृपा सब विधि माँ काली ॥ ५३ ॥karahu kṛpā sab vidhi mām̐ kālī || 53 ||
चौपाई 54
पाठ करै चालीसा जोई ।pāṭh karai cālīsā joī |
तापर कृपा तुम्हारी होइ ॥ ५४ ॥tāpar kṛpā tumhārī hoi || 54 ||
दोहा
जय तारा जय दक्षिणा, कलावती सुखमूल ।jay tārā jay dakṣiṇā, kalāvatī sukhamūl |
शरणागत भक्त है, रहहु सदा अनुकूल ॥śaraṇāgat bhakta hai, rahahu sadā anukūl ||
मुद्रित प्रति के स्कैन से पंक्ति-दर-पंक्ति लिखा गया और एक स्वतन्त्र प्रति से अक्षरशः मिलाया गया। केवल वर्तनी के अन्तर में मुद्रित पाठ रखा गया है।
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
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प्रश्न
श्री काली चालीसा क्या है?
माँ काली की पचपन चौपाइयाँ, जिनमें उनके अनेक रूपों, महाविद्याओं और नवदुर्गाओं के नाम हैं।
श्री काली चालीसा किस देवता से जुड़ा है?
श्री काली चालीसा माँ काली से जुड़ा है। देवी का उग्र रूप, दस महाविद्याओं में प्रथम; बंगाल में काली पूजा पर विशेष रूप से पूजित।
श्री काली चालीसा का अर्थ क्या है?
काली को कपालिनी, कराली, अपर्णा, कात्यायनी, चण्डी, नवदुर्गा और दस महाविद्याओं सहित नामों की लम्बी माला से नमन किया गया है, और उनके श्याम वर्ण, अठारह भुजाओं व आयुधों, मुण्डमाला, लपलपाती जिह्वा और शव पर नृत्य का वर्णन है। उन्हें शुम्भ-निशुम्भ व रक्तबीज की संहारक और बावन शक्तिपीठों की शक्ति कहकर भक्त के हृदय में वास और दोषों की क्षमा की प्रार्थना है।
श्री काली चालीसा का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Shri Kali Chalisa. परम्परा: शाक्त।
क्या श्री काली चालीसा के अलग-अलग संस्करण हैं?
चालीसा की मुद्रित प्रतियों में वर्तनी, कुछ शब्दों और कभी-कभी पदों के क्रम में अन्तर मिलता है। यह पाठ टिप्पणी में बताई प्रति पर आधारित है।