व्रत

वट सावित्री व्रत (अमावस्या)

उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर वट वृक्ष पूजन सहित सौभाग्य व्रत; अपराह्न में अमावस्या वाला दिन।

मेलबर्न, Victoria, Australia -37.8140°, 144.9633° Australia/Melbourne (UTC+10:00) उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित)

बीटा नियम ज्योतिष समीक्षा की प्रतीक्षा में

इस पर्व का तिथि-नियम ठीक वैसे ही लागू किया गया है जैसे प्रलेखित है, परन्तु यह अभी प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा (शास्त्रीय ग्रन्थों और प्रकाशित पंचांगों के आधार पर स्वचालित समीक्षा) में उत्तीर्ण नहीं हुआ है। क्षेत्रीय पंचांगों में अंतर हो सकता है; अपने कुल पुरोहित या स्थानीय मन्दिर से पुष्टि करें।

अगली तिथि जून 2027 4 शुक्रवार 235 दिन बाद

शुक्रवार, 4 जून 2027 का समय

लागू नियम: स्मार्त — तिथि आवश्यक काल को केवल इसी दिन व्याप्त करती है।

पूजा विधि

व्रत कथा

इस पर्व के सभी मन्त्र, आरतियाँ और स्तोत्र

तिथि का निर्धारण कैसे होता है

  1. अमान्त पद्धति (मास अमावस्या पर समाप्त) में यह वैशाख कृष्ण पक्ष अमावस्या है; उत्तर भारत के अधिकांश भाग में प्रचलित पूर्णिमान्त पद्धति (मास पूर्णिमा पर समाप्त) में यही दिन ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या कहलाता है।
  2. यह उस दिन होता है जिस दिन अपराह्न में यह तिथि व्याप्त हो — दिनमान का चौथा पंचमांश, दोपहर बाद।
  3. यदि तिथि लगातार दो दिन उस काल में व्याप्त हो तो जिस दिन वह उस काल के अधिक भाग में रहे, वह दिन लिया जाता है।
  4. यदि तिथि किसी भी दिन उस काल को स्पर्श न करे (क्षय तिथि), तो जिस हिन्दू दिन में तिथि सबसे अधिक समय रहे, वह दिन लिया जाता है।
  5. जिस वर्ष उसी नाम का अधिक मास हो, उस वर्ष यह शुद्ध (निज) मास में मनाया जाता है।

पारम्परिक भिन्नता

उत्तर भारतीय तिथि: अपराह्न में अमावस्या वाला दिन, जो अमावस्या दोपहर के आसपास आरम्भ होने पर शनि जयन्ती से एक दिन पहले हो सकता है (जैसे 26 मई 2025)। ओडिशा में सावित्री अमावस्या सूर्योदय के समय अमावस्या वाले दिन (27 मई 2025) होती है, जो अलग से दी गई है। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में यह व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) को रखा जाता है।

यह ऊपर दिए नियम के अनुसार चुने गए स्थान के लिए तिथि है। यही एकमात्र मान्य तिथि नहीं है: क्षेत्रीय पंचांग, पारिवारिक परम्परा और सम्प्रदाय इसे अलग दिन भी मना सकते हैं।

नियम का स्रोत: North Indian Savitri-vrata on Jyeshtha Amavasya (Purnimanta Jyeshtha Krishna 15). Day rule unchanged, pending review: the Amavasya that prevails at Aparahna (the 4th of the 5 parts of the daytime); when it touches the Aparahna of two days, the day of greater coverage. No Nibandha karmakala for the Savitri vrata has been identified to confirm or replace the Aparahna, and no official North Indian date was found to test it against. Nirnaya Sindhu allows the Chaturdashi-joined Amavasya for this vrata alone ("bhutaviddha na kartavya darsha purnima kadachana, varjayitva ... savitrivratam", quoted there); the Aparahna rule takes that day when Amavasya begins before its Aparahna (26 May 2025), and the next day when Amavasya covers only part of the first Aparahna and the whole of the next (30 May 2022). The Odisha observance is a separate rule (savitri_amavasya_odisha, udaya Amavasya).

परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।

गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-09-29-a0a4505e · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Australia/Melbourne

2026 की तिथियाँ

वट सावित्री व्रत (अमावस्या) — 2026
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
16/05/2026 (शनि)
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
कृष्ण पक्ष अमावस्या: से
  • अपराह्न से (2 घं 1 मि)
सामान्य नियम लागू

2027 की तिथियाँ

वट सावित्री व्रत (अमावस्या) — 2027
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
04/06/2027 (शुक्र) अगली
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
कृष्ण पक्ष अमावस्या: से
  • अपराह्न से (1 घं 56 मि)
सामान्य नियम लागू

सम्बन्धित

व्हाट्सऐप