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आज का गौरी पंचांगम शनिवार, 3 अक्टूबर 2026
गौरी नल्ल नेरम: आपके शहर के लिए दिन और रात के आठ-आठ गौरी भाग, शुभ और अशुभ समय के साथ।
सूर्योदय . सूर्यास्त . ब्रह्म मुहूर्त से . गुलिक काल से . राहु काल से . अभिजित मुहूर्त से . यमगण्ड से . अभी: अष्टमी तिथि, आर्द्रा नक्षत्र।
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 के समय
गौरी पंचांगम दक्षिण भारतीय (तमिल) परंपरा है; उत्तर भारतीय पंचांग इसी काम के लिए चौघड़िया का प्रयोग करते हैं।
- अच्छा उत्ति · अमृत · लाभ · धन · सुख
- अशुभ रोग · चोर · विष
| # | गौरी | समय | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 1 | चोर | से | अशुभ |
| 2 | उत्ति | से | अच्छा |
| 3 | विष | से | अशुभ |
| 4 | अमृत | से | अच्छा |
| 5 | रोग | से | अशुभ |
| 6 | लाभ | से | अच्छा |
| 7 | धन | से | अच्छा |
| 8 | सुख | से | अच्छा |
| # | गौरी | समय | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 1 | लाभ | से | अच्छा |
| 2 | धन | से | अच्छा |
| 3 | सुख | से | अच्छा |
| 4 | चोर | से | अशुभ |
| 5 | उत्ति | से | अच्छा |
| 6 | विष | से | अशुभ |
| 7 | अमृत | से | अच्छा |
| 8 | रोग | से | अशुभ |
परिचय
गौरी पंचांगम (गौरी नल्ल नेरम) मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य भागों में शुभ समय चुनने के लिए प्रयोग होता है। दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है, जिनके नाम उत्ति, अमृत, रोग, लाभ, धन, सुख, चोर और विष हैं। अमृत, उत्ति, लाभ, धन और सुख शुभ माने जाते हैं; रोग, चोर और विष से बचा जाता है।
आपके स्थान पर दिनमान (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात्रिमान (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। नामों का क्रम वार पर निर्भर करता है और मानक प्रकाशित वार-सारणी के अनुसार है।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
इस दिन का सम्पूर्ण पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय और चन्द्रोदय, सभी शुभ-अशुभ काल, पंचक, भद्रा और पर्व — आपके स्थान के लिए।