नन्हे पाठकों के लिए

दिवाली पर हम दीये क्यों जलाते हैं?

एक राजकुमार घर लौटता है, और पूरा नगर उसके स्वागत में जगमगा उठता है।

  1. बहुत पहले, राजकुमार राम चौदह वर्ष तक सीता जी और अपने भाई लक्ष्मण के साथ वन में रहे। वे वीर और दयालु थे, और हमेशा सच बोलते थे।
  2. आख़िर वह दिन आया जब उन्हें अपने घर अयोध्या लौटना था। लोग बहुत ख़ुश थे! उन्होंने अपने घर साफ़ किए और दरवाज़ों पर हरे पत्तों की बंदनवार लगाई।
  3. वह अमावस की अँधेरी रात थी, आसमान में चाँद नहीं था। इसलिए सबने मिट्टी के छोटे दीये जलाए और उन्हें लंबी क़तारों में सजाया। पूरा नगर तारों की तरह चमक उठा।
  4. आज भी हम उस सुंदर घर-वापसी को याद करते हैं। हम दरवाज़े पर रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं।
  5. हम परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिठाई बाँटते हैं। हर छोटा दीया याद दिलाता है कि उजाला अँधेरे से बड़ा है, और दया ग़ुस्से से बड़ी है।

क्या आप जानते हैं?

“दिवाली” शब्द “दीपावली” से बना है, जिसका अर्थ है “दीपों की पंक्ति”।

कुछ बनाइए

काग़ज़ पर बिंदुओं और रेखाओं से एक रंगोली बनाइए और उसमें रंग भरिए। क्या आप उसे हर ओर से एक जैसा बना सकते हैं?

इस साल दीपावली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। बड़ों के लिए तिथि और मुहूर्त

अलग-अलग परिवार और क्षेत्र ये कहानियाँ अलग-अलग ढंग से सुनाते हैं। यह बच्चों के लिए एक सरल रूप है।