मूल मन्त्र · भगवान श्रीकृष्ण

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) Om Namo Bhagavate Vasudevaya (Dvadashakshari Mantra)

वासुदेव (विष्णु–कृष्ण) का द्वादशाक्षरी मन्त्र, जो सभी वैष्णव परम्पराओं में पूज्य है।

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मूल पाठ

मन्त्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥oṃ namo bhagavate vāsudevāya ||

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

पारम्परिक सन्दर्भ

श्रीमद्भागवत में देवर्षि नारद बालक ध्रुव को यह मन्त्र देते हैं। एकादशी, जन्माष्टमी और नित्य वैष्णव पूजा में इसका जप होता है।

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प्रश्न

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) क्या है?

वासुदेव (विष्णु–कृष्ण) का द्वादशाक्षरी मन्त्र, जो सभी वैष्णव परम्पराओं में पूज्य है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) किस देवता से जुड़ा है?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है। भगवद्गीता के उपदेशक, व्रज के प्रिय, भगवान विष्णु के अवतार; अनेक वैष्णव परम्पराएँ उन्हें परमेश्वर मानती हैं। जन्माष्टमी उनका जन्मोत्सव है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) का अर्थ क्या है?

ॐ — भगवान वासुदेव को नमस्कार।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?

श्रीमद्भागवत में देवर्षि नारद बालक ध्रुव को यह मन्त्र देते हैं। एकादशी, जन्माष्टमी और नित्य वैष्णव पूजा में इसका जप होता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षरी मन्त्र) का स्रोत क्या है?

श्रीमद्भागवत महापुराण — Bhagavata Purana, Skandha 4, chapter 8 (Narada's instruction to Dhruva). परम्परा: वैष्णव।

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