समुद्रवसने देवि (भूमि वन्दना) Samudra Vasane Devi (prayer to Mother Earth)
प्रातः भूमि पर पैर रखने से पहले बोला जाने वाला श्लोक, जिसमें धरती माता से पैरों के स्पर्श के लिए क्षमा माँगी जाती है।
- प्रकार दैनिक प्रार्थना
- भाषा संस्कृत
- परम्परा अनेक परम्पराओं में प्रचलित
- स्रोत पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Traditional morning verse
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मूल पाठ
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श्लोक
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते ।samudravasane devi parvatastanamaṇḍite |
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥viṣṇupatni namastubhyaṃ pādasparśaṃ kṣamasva me ||
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
प्रश्न
समुद्रवसने देवि (भूमि वन्दना) क्या है?
प्रातः भूमि पर पैर रखने से पहले बोला जाने वाला श्लोक, जिसमें धरती माता से पैरों के स्पर्श के लिए क्षमा माँगी जाती है।
समुद्रवसने देवि (भूमि वन्दना) का अर्थ क्या है?
हे समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली, पर्वतों से सुशोभित, विष्णुपत्नी देवी — आपको नमस्कार; मेरे पैरों के स्पर्श को क्षमा करें।
समुद्रवसने देवि (भूमि वन्दना) का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Traditional morning verse. परम्परा: अनेक परम्पराओं में प्रचलित।