प्रसाद · भोग · नैवेद्य · महाराष्ट्र, कर्नाटक (होळिगे/ओब्बट्टु), गुजरात (वेडमी)

पूरन पोळी

मीठी चने की दाल और गुड़ से भरी मुलायम रोटी — होली और गुढी पाडवा का पर्व-नैवेद्य।

तैयारी30 मिनट
पकाने में1 घंटे
कितने लोगों के लिए8

व्रत में उपयुक्तता

बिना नमकबिना प्याज़-लहसुन

इसमें अनाज या दालें हैं, इसलिए यह प्रायः त्योहार के प्रसाद के रूप में बनता है, कठोर व्रत में नहीं खाया जाता।

व्रत और भोग की परम्पराएँ परिवार, क्षेत्र और सम्प्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं — कुछ लोग नमक, दूध, चीनी या कुछ सब्ज़ियाँ बिल्कुल नहीं लेते। अपनी परम्परा और बड़ों के मार्गदर्शन का पालन करें।

कब अर्पित करते हैं

होलिका की अग्नि और होली पर अर्पित; गुढी पाडवा और उगादि पर नैवेद्य

सामग्री

8 लोगों के लिए। 1 कप = 240 मि.ली.।

  • 1 कप चने की दाल, धोकर 1 घंटा भिगोई हुई
  • 1 कप कसा हुआ गुड़
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर और एक चुटकी जायफल
  • 1½ कप गेहूँ का आटा (या आधा मैदा)
  • आटे के लिए 2 बड़े चम्मच तेल, एक चुटकी हल्दी
  • सेंकने और परोसने के लिए घी

विधि

  1. आटा, हल्दी, तेल और पानी से बहुत नरम, थोड़ा चिपचिपा आटा गूँधें। कम से कम 1 घंटा रखें।
  2. दाल को पानी में नरम होने तक पकाएँ पर गलने न दें; अच्छी तरह पानी निकाल लें (चाहें तो यह पानी कटाची आमटी के लिए रखें)।
  3. दाल को गुड़ के साथ धीमी आँच पर चलाते हुए तब तक पकाएँ जब तक इतना गाढ़ा न हो जाए कि चम्मच खड़ा रहे। इलायची-जायफल डालकर गरम रहते ही मसलकर या पीसकर चिकना करें। ठंडा करें।
  4. नींबू के बराबर पूरन की गोली को उससे छोटी आटे की लोई में लपेटें, बंद करें और चावल का आटा छिड़ककर हल्के हाथ से पतला बेलें।
  5. गरम तवे पर घी के साथ दोनों ओर सुनहरे धब्बे आने तक सेंकें। ऊपर एक चम्मच घी रखकर नैवेद्य लगाएँ।

पूरन गाढ़ा और ठंडा होना चाहिए, वरना बेलते समय पोळी फट जाती है। कुछ क्षेत्रों में अरहर की दाल या नारियल का पूरन बनता है।

इन पर्वों पर ये भी चढ़ाए जाते हैं

ये विधियाँ हमारी संपादकीय टीम ने घरों की प्रचलित परम्परा के आधार पर लिखी हैं। माप: 1 कप = 240 मि.ली., 1 बड़ा चम्मच = 15 मि.ली., 1 छोटा चम्मच = 5 मि.ली.।

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