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त्योहार और व्रत 16
- प्रदोष व्रत (कृष्ण) प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर संध्या को शिव पूजन।
- प्रदोष व्रत (शुक्ल) प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर संध्या को शिव पूजन।
- प्रतिपदा श्राद्ध प्रतिपदा तिथि को दिवंगत पितरों का श्राद्ध।
- वट सावित्री व्रत (अमावस्या) उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर वट वृक्ष पूजन सहित सौभाग्य व्रत; अपराह्न में अमावस्या वाला दिन।
- हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को माता पार्वती का व्रत।
- चैत्र नवरात्रि देवी उपासना की नौ रात्रियाँ, राम नवमी पर समापन।
- चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ (घटस्थापना) चैत्र में देवी उपासना की नौ रात्रियों का पहला दिन; हिन्दू नववर्ष।
- शारदीय नवरात्रि आश्विन में देवी उपासना की नौ रात्रियाँ।
- शारदीय नवरात्रि प्रारम्भ (घटस्थापना) शारदीय नवरात्रि का प्रथम दिन; प्रातः घटस्थापना।
- अहोई अष्टमी संतान के कल्याण हेतु माताओं का व्रत, संध्या को पूर्ण।
- दुर्गा अष्टमी शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी।
- महानवमी शारदीय नवरात्रि का नौवाँ दिन।
- ऋषि पंचमी सप्तर्षियों के सम्मान में व्रत।
- संकष्टी चतुर्थी कृष्ण चतुर्थी को गणेश व्रत, चन्द्रोदय के बाद पारण।
- सावित्री अमावस्या (ओडिशा) ओडिशा में ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर सौभाग्य के लिए सावित्री व्रत; सूर्योदय के समय अमावस्या वाला दिन, जैसा ओडिशा सरकार की अवकाश सूची में है।
- वट पूर्णिमा अमान्त क्षेत्रों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत।
मुहूर्त 2
मंत्र और भक्ति 10
- एकादशी व्रत और पूजा विधि एकादशी व्रत कैसे रखें और भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें — दशमी की तैयारी, तुलसी और पीले फूल, व्रत के प्रकार और पारण।
- महामृत्युंजय मंत्र त्रिनेत्र शिव से मृत्यु के बन्धन से मुक्ति की ऋग्वैदिक प्रार्थना (7.59.12)।
- ॐ नमः शिवाय (पंचाक्षरी मन्त्र) शिव का पंचाक्षरी मन्त्र (न-मः-शि-वा-य), जिसके आरम्भ में सामान्य जप में ॐ जोड़ा जाता है; शैव भक्ति का केन्द्रीय मन्त्र।
- श्री शिव चालीसा अयोध्यादास रचित भगवान शिव की चालीस चौपाइयाँ, आरम्भ और अन्त के दोहों सहित।
- लिङ्गाष्टकम् शिवलिंग की स्तुति के आठ श्लोक, जिनमें प्रत्येक 'तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्' पर समाप्त होता है।
- शिव ताण्डव स्तोत्र शिव के ताण्डव नृत्य की तीव्र लय वाली स्तुति, परम्परा से रावण कृत।
- शिव महिम्न स्तोत्र पुष्पदन्त की शिव महिमा की स्तुति, जिसके बारे में कवि कहता है कि कोई वाणी उसकी सीमा तक नहीं पहुँचती।
- बिल्वाष्टकम् शिव को एक बिल्वपत्र अर्पित करने के आठ छोटे श्लोक, हर श्लोक "एकबिल्वं शिवार्पितम्" पर समाप्त।
- भवान्यष्टकम् देवी भवानी के प्रति पूर्ण शरणागति के आठ श्लोक; हर श्लोक "गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि" पर समाप्त होता है।
- कया नश्चित्र (राहु वैदिक मन्त्र) इन्द्र का ऋग्वैदिक मन्त्र, जो ग्रह-शान्ति अनुष्ठानों में राहु के लिए पढ़ा जाता है।
लेख 4
- प्रदोष व्रत: प्रदोष काल और तिथि-निर्णय प्रदोष व्रत में त्रयोदशी की संध्या को शिव पूजन होता है। जानिए प्रदोष काल क्या है, व्रत का दिन कैसे तय होता है और वार के अनुसार नाम।
- एकादशी व्रत: तिथि-निर्णय और पारण का समय एकादशी कभी-कभी दो तिथियों पर क्यों दिखती है, स्मार्त और वैष्णव नियम में क्या अंतर है, और द्वादशी पर पारण का समय कैसे निकाला जाता है।
- संकष्टी चतुर्थी: चन्द्रोदय और मासिक गणेश व्रत संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला मासिक गणेश व्रत है, जो चन्द्रोदय के बाद पूर्ण होता है। जानिए इसकी तिथि और चन्द्रोदय का समय कैसे निकलता है।
- नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि दो प्रमुख नवरात्रियाँ, घटस्थापना का समय कैसे तय होता है, और नवरात्रि कभी आठ या दस दिन की क्यों होती है।