आज का श्लोक

आज का श्लोक रविवार, 18 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

चाणक्य नीति 5.15

विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च ।vidyā mitraṃ pravāseṣu bhāryā mitraṃ gṛheṣu ca |

व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥vyādhitasyauṣadhaṃ mitraṃ dharmo mitraṃ mṛtasya ca ||

अर्थ

परदेश में विद्या मित्र है, घर में पत्नी मित्र है, रोगी का मित्र औषधि है और मरने के बाद धर्म ही मित्र है।

Learning is a friend abroad, a spouse is a friend at home, medicine is a friend in sickness, and dharma is the friend after death.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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