आज का श्लोक रविवार, 22 मार्च 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 12.13
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca |
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī ||
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अर्थ
जो किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र और दयालु है, ममता और अहंकार से रहित है, सुख-दुःख में समान और क्षमाशील है (प्रिय भक्त का यह वर्णन 12.14 में पूरा होता है)।
One who bears no ill will to any being, who is friendly and compassionate, free of possessiveness and ego, even in joy and sorrow, and forgiving (the description of the devotee dear to Krishna continues in 12.14).
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 21/03/2026 (शनि) तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । श्रीमद्भगवद्गीता 3.19
- 20/03/2026 (शुक्र) अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् । गुरुगीता
- 19/03/2026 (गुरु) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः । मुण्डकोपनिषद् 2.2.8
- 18/03/2026 (बुध) असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.35
- 17/03/2026 (मंगल) न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.20
- 16/03/2026 (सोम) धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः । मनुस्मृति 8.15
- 15/03/2026 (रवि) अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् । श्रीमद्भगवद्गीता 17.15
- 14/03/2026 (शनि) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । श्रीमद्भगवद्गीता 4.7
- 13/03/2026 (शुक्र) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं पारम्परिक प्रार्थना
- 12/03/2026 (गुरु) एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा । श्वेताश्वतरोपनिषद् 6.11
- 11/03/2026 (बुध) अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 8.5
- 10/03/2026 (मंगल) नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 2.40
- 09/03/2026 (सोम) न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि । पारम्परिक सुभाषित
- 08/03/2026 (रवि) ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । ईशावास्योपनिषद् 1
- 07/03/2026 (शनि) न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 4.38
- 06/03/2026 (शुक्र) कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् । श्रीमद्भागवत पुराण 11.2.36
- 05/03/2026 (गुरु) ॐ भूर्भुवः स्वः । ऋग्वेद 3.62.10
- 04/03/2026 (बुध) समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः । श्रीमद्भगवद्गीता 9.29
- 03/03/2026 (मंगल) ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । श्रीमद्भगवद्गीता 2.62
- 02/03/2026 (सोम) आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः । नीतिशतक (भर्तृहरि के नाम से प्रचलित)
- 01/03/2026 (रवि) उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत । कठोपनिषद् 1.3.14
- 28/02/2026 (शनि) उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.5
- 27/02/2026 (शुक्र) मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे । निर्वाणषट्कम् (आदि शंकराचार्य) 1
- 26/02/2026 (गुरु) ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता) 36.17
- 25/02/2026 (बुध) मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । श्रीमद्भगवद्गीता 12.8
- 24/02/2026 (मंगल) नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.8
- 23/02/2026 (सोम) गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुगीता
- 22/02/2026 (रवि) द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते । मुण्डकोपनिषद् 3.1.1
- 21/02/2026 (शनि) यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति । श्रीमद्भगवद्गीता 6.30
- 20/02/2026 (शुक्र) मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.14