आज का श्लोक गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 10.8
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते ।ahaṃ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṃ pravartate |
इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ॥iti matvā bhajante māṃ budhā bhāvasamanvitāḥ ||
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अर्थ
मैं ही सबका उद्गम हूँ, मुझसे ही सब कुछ चलता है; यह जानकर बुद्धिमान लोग श्रद्धा-भाव से मुझे भजते हैं।
I am the source of all; everything proceeds from Me. Knowing this, the wise worship Me with deep feeling.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 22/04/2026 (बुध) या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी । श्रीमद्भगवद्गीता 2.69
- 21/04/2026 (मंगल) मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् । पारम्परिक सुभाषित
- 20/04/2026 (सोम) आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु । कठोपनिषद् 1.3.3
- 19/04/2026 (रवि) युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । श्रीमद्भगवद्गीता 6.17
- 18/04/2026 (शनि) मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । रामरक्षास्तोत्र (बुधकौशिक) 33
- 17/04/2026 (शुक्र) विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् । हितोपदेश, प्रस्ताविका 6
- 16/04/2026 (गुरु) यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः । श्रीमद्भगवद्गीता 12.15
- 15/04/2026 (बुध) यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.21
- 14/04/2026 (मंगल) त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । पारम्परिक प्रार्थना
- 13/04/2026 (सोम) सत्यं वद । तैत्तिरीयोपनिषद् 1.11.1
- 12/04/2026 (रवि) पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 6.40
- 11/04/2026 (शनि) वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । श्रीमद्भगवद्गीता 2.22
- 10/04/2026 (शुक्र) सुलभाः पुरुषा राजन्सततं प्रियवादिनः । वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड 37.2
- 09/04/2026 (गुरु) दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे । श्रीमद्भगवद्गीता 17.20
- 08/04/2026 (बुध) परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । श्रीमद्भगवद्गीता 4.8
- 07/04/2026 (मंगल) या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता पारम्परिक प्रार्थना
- 06/04/2026 (सोम) सर्वं ह्येतद् ब्रह्मायमात्मा ब्रह्म सोऽयमात्मा चतुष्पात् ॥ माण्डूक्योपनिषद् 2
- 05/04/2026 (रवि) तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च । श्रीमद्भगवद्गीता 8.7
- 04/04/2026 (शनि) कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । श्रीमद्भगवद्गीता 2.47
- 03/04/2026 (शुक्र) परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः । पारम्परिक सुभाषित
- 02/04/2026 (गुरु) कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः । ईशावास्योपनिषद् 2
- 01/04/2026 (बुध) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । श्रीमद्भगवद्गीता 4.39
- 31/03/2026 (मंगल) मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः । पारम्परिक प्रार्थना
- 30/03/2026 (सोम) आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः । ऋग्वेद 1.89.1
- 29/03/2026 (रवि) मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । श्रीमद्भगवद्गीता 9.34
- 28/03/2026 (शनि) क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.63
- 27/03/2026 (शुक्र) अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । पारम्परिक सुभाषित
- 26/03/2026 (गुरु) नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । कठोपनिषद् 1.2.23
- 25/03/2026 (बुध) बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः । श्रीमद्भगवद्गीता 6.6
- 24/03/2026 (मंगल) श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । विष्णु सहस्रनाम (उत्तरभाग)