आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 1 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

मनुस्मृति 3.56

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।yatra nāryastu pūjyante ramante tatra devatāḥ |

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ॥yatraitāstu na pūjyante sarvāstatrāphalāḥ kriyāḥ ||

अर्थ

जहाँ नारियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं; जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ सारे कर्म निष्फल हो जाते हैं।

Where women are honoured, the gods rejoice; where they are not honoured, every rite is fruitless.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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