आगामी व्रत तिथियाँ
अगले 90 दिनों के मासिक और वार्षिक व्रत — प्रत्येक तिथि निर्धारित करने वाले काल और जहाँ लागू हो वहाँ पारण समय सहित।
इस डिवाइस पर पूर्णिमा और अमावस्या रिमाइंडर चालू हैं। सभी रिमाइंडर प्रबंधित करें
मासिक व्रत
ये व्रत हर चान्द्र मास में आते हैं। प्रत्येक एक विशेष तिथि के दिन के एक विशेष काल में व्याप्त होने से निश्चित होता है।
- सोमवार, 9 नवंबर 2026
- गुरुवार, 5 नवंबर 2026
- गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
- सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
- शनिवार, 7 नवंबर 2026
-
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर संध्या को शिव पूजन।
24 दिन बाद 06/11/2026 (शुक्र)
-
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
प्रदोष काल में त्रयोदशी होने पर संध्या को शिव पूजन।
10 दिन बाद 23/10/2026 (शुक्र)
- सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
- गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
- बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
अगले 90 दिन
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 से रविवार, 10 जनवरी 2027 तक
अक्टूबर 2026कुल 7
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बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
विनायक चतुर्थी
- मध्याह्न से 2 घं 18 मि
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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
6 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 19/10/2026 (सोम)
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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
पापांकुशा एकादशी
पारण से
9 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 22/10/2026 (गुरु) -
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
- प्रदोष काल से 2 घं 33 मि
10 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 23/10/2026 (शुक्र) -
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
13 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 26/10/2026 (सोम)
-
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
16 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 29/10/2026 (गुरु)
-
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
संकष्टी चतुर्थी
- चन्द्रोदय
16 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 29/10/2026 (गुरु)
नवंबर 2026कुल 11
-
रविवार, 1 नवंबर 2026
19 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 01/11/2026 (रवि)
-
गुरुवार, 5 नवंबर 2026
रमा एकादशी
पारण से
23 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 05/11/2026 (गुरु) -
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
- प्रदोष काल से 2 घं 37 मि
24 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 06/11/2026 (शुक्र) -
शनिवार, 7 नवंबर 2026
मासिक शिवरात्रि
- निशीथ काल से 0 घं 52 मि
25 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 07/11/2026 (शनि) -
सोमवार, 9 नवंबर 2026
27 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 09/11/2026 (सोम)
-
शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
विनायक चतुर्थी
- मध्याह्न से 2 घं 9 मि
31 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 13/11/2026 (शुक्र) -
मंगलवार, 17 नवंबर 2026
35 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 17/11/2026 (मंगल)
-
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी
पारण से
38 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 20/11/2026 (शुक्र) -
रविवार, 22 नवंबर 2026
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
- प्रदोष काल से 2 घं 41 मि
40 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 22/11/2026 (रवि) -
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
42 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 24/11/2026 (मंगल)
-
शुक्रवार, 27 नवंबर 2026
संकष्टी चतुर्थी
- चन्द्रोदय
45 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 27/11/2026 (शुक्र)
दिसंबर 2026कुल 10
-
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
उत्पन्ना एकादशी
पारण से
52 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 04/12/2026 (शुक्र) -
रविवार, 6 दिसंबर 2026
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
- प्रदोष काल से 2 घं 43 मि
54 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 06/12/2026 (रवि) -
सोमवार, 7 दिसंबर 2026
मासिक शिवरात्रि
- निशीथ काल से 0 घं 54 मि
55 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 07/12/2026 (सोम) -
मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
56 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 08/12/2026 (मंगल)
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रविवार, 13 दिसंबर 2026
विनायक चतुर्थी
- मध्याह्न से 2 घं 4 मि
61 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 13/12/2026 (रवि) -
गुरुवार, 17 दिसंबर 2026
65 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 17/12/2026 (गुरु)
-
रविवार, 20 दिसंबर 2026
मोक्षदा एकादशी
पारण से
68 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 20/12/2026 (रवि) -
सोमवार, 21 दिसंबर 2026
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
- प्रदोष काल से 2 घं 36 मि
69 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 21/12/2026 (सोम) -
बुधवार, 23 दिसंबर 2026
71 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 23/12/2026 (बुध)
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शनिवार, 26 दिसंबर 2026
संकष्टी चतुर्थी
- चन्द्रोदय
74 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 26/12/2026 (शनि)
जनवरी 2027कुल 4
-
रविवार, 3 जनवरी 2027
सफला एकादशी
पारण से
82 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 03/01/2027 (रवि) -
मंगलवार, 5 जनवरी 2027
मासिक शिवरात्रि
- निशीथ काल से 0 घं 54 मि
84 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 05/01/2027 (मंगल) -
मंगलवार, 5 जनवरी 2027
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
- प्रदोष काल से 2 घं 43 मि
84 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 05/01/2027 (मंगल) -
गुरुवार, 7 जनवरी 2027
86 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 07/01/2027 (गुरु)
अन्य हिन्दू पंचांग सूचियाँ
व्रत, एकादशी, श्राद्ध, संक्रान्ति और ध्यान रखने योग्य काल — सब आपके स्थान के लिए गणित।
ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं
प्रत्येक व्रत उस दिन होता है जिस दिन उसकी तिथि आवश्यक काल में व्याप्त हो (जैसे प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल में त्रयोदशी, संकष्टी के लिए चन्द्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि के लिए निशीथ काल में कृष्ण चतुर्दशी)। पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से दिखाई गई हैं।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।