बीज मन्त्र · राहु

राहु बीज मन्त्र Rahu Beej Mantra

ज्योतिष परम्परा में प्रयुक्त राहु का प्रचलित त्रि-बीज मन्त्र।

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मार्गदर्शन-सूचना। कुछ परम्पराओं के अनुसार बीज मन्त्रों का अभ्यास योग्य गुरु के मार्गदर्शन में होना चाहिए। अपनी परंपरा के निर्देशों का पालन करें।

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मूल पाठ

मन्त्र

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ॥oṃ bhrāṃ bhrīṃ bhrauṃ saḥ rāhave namaḥ ||

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

पारम्परिक सन्दर्भ

ग्रह बीज मन्त्र परंपरागत ज्योतिषीय उपायों में गिने जाते हैं। कुछ ज्योतिष परम्पराएँ कुण्डली में निर्बल या पीड़ित माने गए ग्रह के लिए इनके जप को जोड़ती हैं। यह परम्परागत प्रथा है; किसी परिणाम की गारण्टी नहीं है।

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राहु के और पाठ

प्रश्न

राहु बीज मन्त्र क्या है?

ज्योतिष परम्परा में प्रयुक्त राहु का प्रचलित त्रि-बीज मन्त्र।

राहु बीज मन्त्र किस देवता से जुड़ा है?

राहु बीज मन्त्र राहु से जुड़ा है। नवग्रहों में उत्तर चन्द्र-पात, एक छाया ग्रह।

राहु बीज मन्त्र का अर्थ क्या है?

ॐ, (बीज भ्रां भ्रीं भ्रौं सः) — राहु को नमस्कार।

राहु बीज मन्त्र का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?

ग्रह बीज मन्त्र परंपरागत ज्योतिषीय उपायों में गिने जाते हैं। कुछ ज्योतिष परम्पराएँ कुण्डली में निर्बल या पीड़ित माने गए ग्रह के लिए इनके जप को जोड़ती हैं। यह परम्परागत प्रथा है; किसी परिणाम की गारण्टी नहीं है।

राहु बीज मन्त्र का स्रोत क्या है?

पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Commonly printed in Jyotish and graha-shanti manuals. परम्परा: अनेक परम्पराओं में प्रचलित।

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