लोक एवं क्षेत्रीय देवता

बाबा रामदेव (रामदेवजी)

राजस्थान के लोक देवता, जिन्हें पश्चिमी भारत में अनेक समुदायों के हिन्दू और कुछ मुसलमान (रामशाह पीर के रूप में) पूजते हैं; उनकी समाधि पोकरण के निकट रामदेवरा (रुणिचा) में है।

अन्य नाम: Ramdevji · Ramdev ji · Baba Ramdev · Ramdev Pir · Ramdev Peer · Ramapir · Rama Pir · Ramsa Pir · Ramshah Pir · Runiche Ra Dhani · रामदेवजी · रामदेव जी · बाबा रामदेव · रामदेव पीर · रामापीर · रामसा पीर

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परिचय

परम्परा के अनुसार रामदेवजी का जन्म तँवर (तोमर) राजपूत कुल में हुआ और वे चौदहवीं या पन्द्रहवीं शताब्दी में हुए; पारम्परिक विवरणों में तिथियाँ अलग-अलग मिलती हैं। वे छुआछूत के विरोध और दीन-दुखियों की सेवा के लिए स्मरण किए जाते हैं, और उनके भक्त अनेक समुदायों से आते हैं; मेघवाल समुदाय में उनके प्रति विशेष श्रद्धा है। अनेक हिन्दू भक्त उन्हें श्रीकृष्ण (द्वारकाधीश) का अवतार मानते हैं।

रामदेवरा का बड़ा मेला भाद्रपद में शुक्ल द्वितीया ('बाबा री बीज') से आरम्भ होता है, जब अनेक भक्त दूर-दूर से पैदल आते हैं। उनके चरण-चिह्न (पगल्या), कपड़े के घोड़े और ध्वजाएँ प्रचलित भक्ति-प्रतीक हैं। राजस्थानी भजनों के साथ रात भर चलने वाले जम्मा जागरण उनकी उपासना का महत्त्वपूर्ण अंग हैं।

उपासना की रीतियाँ, भजन और प्रार्थनाएँ क्षेत्र और समुदाय के अनुसार भिन्न हैं। यह संग्रह उन्हें क्षेत्रीय और सामुदायिक परम्परा के रूप में दर्ज करता है, सभी हिन्दुओं के लिए नियम के रूप में नहीं।

जीवन-परिचय व्यापक रूप से प्रकाशित पारम्परिक विवरणों पर आधारित है; ऐतिहासिक तिथियाँ अनिश्चित हैं और पारम्परिक रूप में दी गई हैं।

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