गायत्री मन्त्र · भगवान शिव

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) Rudra Gayatri (Shiva Gayatri)

महानारायण उपनिषद् की रुद्र–शिव गायत्री।

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मूल पाठ

मन्त्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।oṃ tatpuruṣāya vidmahe mahādevāya dhīmahi |

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥tanno rudraḥ pracodayāt ||

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

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प्रश्न

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) क्या है?

महानारायण उपनिषद् की रुद्र–शिव गायत्री।

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) किस देवता से जुड़ा है?

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) भगवान शिव से जुड़ा है। महादेव — कल्याणकारी, योगेश्वर और परिवर्तन के देवता; शैव परम्पराओं के केन्द्रीय आराध्य।

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) का अर्थ क्या है?

हम उस परम पुरुष को जानें; महादेव का ध्यान करें; रुद्र हमें प्रेरित करें।

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) का स्रोत क्या है?

महानारायण उपनिषद् (तैत्तिरीय आरण्यक, दशम प्रपाठक) — Mahanarayana Upanishad (Taittiriya Aranyaka 10), the Gayatris of the deities. परम्परा: वैदिक।

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) का उच्चारण कैसे करें?

इस लिपि और लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखाए गए हैं।

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