अन्नम नैवेद्यम (घी और दाल के साथ चावल)
घी और सादी दाल के साथ पके चावल — दक्षिण भारत के अनेक घरों का रोज़ का नैवेद्य।
व्रत में उपयुक्तता
नमक वालाबिना प्याज़-लहसुनइसमें अनाज या दालें हैं, इसलिए यह प्रायः त्योहार के प्रसाद के रूप में बनता है, कठोर व्रत में नहीं खाया जाता।
व्रत और भोग की परम्पराएँ परिवार, क्षेत्र और सम्प्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं — कुछ लोग नमक, दूध, चीनी या कुछ सब्ज़ियाँ बिल्कुल नहीं लेते। अपनी परम्परा और बड़ों के मार्गदर्शन का पालन करें।
कब अर्पित करते हैं
घर की रोज़ की पूजा में कुलदेवता को; वरलक्ष्मी व्रतम और अन्य घरेलू पूजाओं पर भी
सामग्री
4 लोगों के लिए। 1 कप = 240 मि.ली.।
- 1 कप चावल
- ¼ कप अरहर या मूँग की दाल
- ¼ छोटा चम्मच हल्दी
- स्वादानुसार नमक (दाल के लिए)
- 2 बड़े चम्मच घी
- कुछ करी पत्ते और ½ छोटा चम्मच जीरा (दाल के तड़के के लिए, इच्छानुसार)
विधि
- चावल धोकर लगभग 2½ कप पानी में नरम होने तक पकाएँ।
- दाल को हल्दी के साथ इतना पकाएँ कि मसली जा सके; नमक डालें।
- चाहें तो थोड़े घी में जीरा और करी पत्ते का तड़का दाल में लगाएँ।
- साफ़ केले के पत्ते या थाली में चावल रखें, ऊपर घी डालें और पास में दाल रखें।
- किसी के खाने से पहले भोग लगाएँ, अपनी परम्परा के अनुसार थाली के चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें, फिर परिवार को परोसें।
नैवेद्य भोजन चखने से पहले अर्पित किया जाता है। क्या चढ़ाया जाए और नमक डाला जाए या नहीं, यह परिवार और मंदिर की परम्परा पर निर्भर है।
ये विधियाँ हमारी संपादकीय टीम ने घरों की प्रचलित परम्परा के आधार पर लिखी हैं। माप: 1 कप = 240 मि.ली., 1 बड़ा चम्मच = 15 मि.ली., 1 छोटा चम्मच = 5 मि.ली.।