आज का श्लोक बुधवार, 6 मई 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 2.23
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।nainaṃ chindanti śastrāṇi nainaṃ dahati pāvakaḥ |
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥na cainaṃ kledayantyāpo na śoṣayati mārutaḥ ||
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अर्थ
आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग जला सकती है, न पानी गीला कर सकता है और न हवा सुखा सकती है।
Weapons do not cut the self, fire does not burn it, water does not wet it and wind does not dry it.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 05/05/2026 (मंगल) सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् । किरातार्जुनीयम् (भारवि) 2.30
- 04/05/2026 (सोम) यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । श्रीमद्भगवद्गीता 18.46
- 03/05/2026 (रवि) ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । श्रीमद्भगवद्गीता 4.24
- 02/05/2026 (शनि) सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.10
- 01/05/2026 (शुक्र) स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदं सर्वं तत्सत्यं स आत्मा । छान्दोग्योपनिषद् 6.8.7
- 30/04/2026 (गुरु) अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते । श्रीमद्भगवद्गीता 9.22
- 29/04/2026 (बुध) योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय । श्रीमद्भगवद्गीता 2.48
- 28/04/2026 (मंगल) अपि क्रियार्थं सुलभं समित्कुशं जलान्यपि स्नानविधिक्षमाणि ते । कुमारसम्भवम् (कालिदास) 5.33
- 27/04/2026 (सोम) यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति । ईशावास्योपनिषद् 6
- 26/04/2026 (रवि) ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः । श्रीमद्भगवद्गीता 5.10
- 25/04/2026 (शनि) आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम् । पारम्परिक प्रार्थना
- 24/04/2026 (शुक्र) इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् । ऋग्वेद 1.164.46
- 23/04/2026 (गुरु) अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते । श्रीमद्भगवद्गीता 10.8
- 22/04/2026 (बुध) या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी । श्रीमद्भगवद्गीता 2.69
- 21/04/2026 (मंगल) मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् । पारम्परिक सुभाषित
- 20/04/2026 (सोम) आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु । कठोपनिषद् 1.3.3
- 19/04/2026 (रवि) युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । श्रीमद्भगवद्गीता 6.17
- 18/04/2026 (शनि) मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । रामरक्षास्तोत्र (बुधकौशिक) 33
- 17/04/2026 (शुक्र) विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् । हितोपदेश, प्रस्ताविका 6
- 16/04/2026 (गुरु) यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः । श्रीमद्भगवद्गीता 12.15
- 15/04/2026 (बुध) यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.21
- 14/04/2026 (मंगल) त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । पारम्परिक प्रार्थना
- 13/04/2026 (सोम) सत्यं वद । तैत्तिरीयोपनिषद् 1.11.1
- 12/04/2026 (रवि) पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 6.40
- 11/04/2026 (शनि) वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । श्रीमद्भगवद्गीता 2.22
- 10/04/2026 (शुक्र) सुलभाः पुरुषा राजन्सततं प्रियवादिनः । वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड 37.2
- 09/04/2026 (गुरु) दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे । श्रीमद्भगवद्गीता 17.20
- 08/04/2026 (बुध) परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । श्रीमद्भगवद्गीता 4.8
- 07/04/2026 (मंगल) या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता पारम्परिक प्रार्थना
- 06/04/2026 (सोम) सर्वं ह्येतद् ब्रह्मायमात्मा ब्रह्म सोऽयमात्मा चतुष्पात् ॥ माण्डूक्योपनिषद् 2