आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 2 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 2.14

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।mātrāsparśāstu kaunteya śītoṣṇasukhaduḥkhadāḥ |

आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥āgamāpāyino'nityāstāṃstitikṣasva bhārata ||

अर्थ

इन्द्रियों और विषयों के संयोग से सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख होते हैं। ये आते-जाते हैं, स्थायी नहीं हैं; इन्हें सहना सीखो।

Contact of the senses with their objects brings cold and heat, pleasure and pain. They come and go and do not last; learn to endure them.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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