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मंत्र और भक्ति 17
- मंगल देव नवग्रहों में मंगल; मंगलवार उनका दिन है।
- सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये देवी माहात्म्य का देवी-स्तुति श्लोक, जो नवरात्र में व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।
- मंगल बीज मन्त्र ज्योतिष परम्परा में प्रयुक्त मंगल का प्रचलित त्रि-बीज मन्त्र।
- अग्निर्मूर्धा (मंगल वैदिक मन्त्र) अग्नि का ऋग्वैदिक मन्त्र, जो ग्रह-शान्ति अनुष्ठानों में मंगल के लिए पढ़ा जाता है।
- अर्गला स्तोत्र चण्डिका की स्तुति जिसका पाठ देवी कवच के साथ दुर्गा सप्तशती से पहले होता है; टेक है "रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि"।
- नवग्रह स्तोत्रम् नौ ग्रहों में प्रत्येक को एक-एक श्लोक से नमन, जिसे परम्परा से व्यास कृत माना जाता है।
- श्री हनुमान चालीसा हनुमान जी की स्तुति में अवधी की चालीस चौपाइयाँ, आरम्भ और अन्त के दोहों सहित; परम्परा से गोस्वामी तुलसीदास कृत।
- आरती कीजै हनुमान लला की श्री हनुमान की आरती।
- सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) भगवान सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय, मुरुगन) के आठ श्लोक, हर श्लोक "वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम्" पर समाप्त।
- श्री शिव चालीसा अयोध्यादास रचित भगवान शिव की चालीस चौपाइयाँ, आरम्भ और अन्त के दोहों सहित।
- मनोजवं मारुततुल्यवेगं श्रीराम के दूत हनुमान जी की शरण का श्लोक; यह रामरक्षा स्तोत्र में आता है।
- ॐ हं हनुमते नमः बीज 'हं' सहित हनुमान जी का छोटा मन्त्र, जो मंगलवार और शनिवार को प्रायः जपा जाता है।
- अतुलितबलधामं रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड के आरम्भ में आने वाला हनुमान वन्दना का श्लोक।
- श्री भैरव चालीसा काशी के कोतवाल भैरव की चालीस चौपाइयाँ, जिनमें उनके रूपों और नामों की सूची है।
- श्री काली चालीसा माँ काली की पचपन चौपाइयाँ, जिनमें उनके अनेक रूपों, महाविद्याओं और नवदुर्गाओं के नाम हैं।
- श्री महाकाली चालीसा महाकाली की एक और चालीसा, जिसमें उन्हें कलकत्ते की दक्षिणा काली और सबमें व्याप्त शक्ति कहा गया है।
- श्री राधा चालीसा वृषभानु-दुलारी, वृन्दावन में श्रीकृष्ण की प्रिया राधा की चालीस चौपाइयाँ।