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लेख 9
- पंचांग क्या है? हिन्दू काल-गणना के पाँच अंग पंचांग पारंपरिक हिन्दू काल-पत्र है, जो पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — पर आधारित है और किसी विशेष स्थान व दिन के लिए गणना किया जाता है।
- अयनांश: पंचांगों में कुछ मिनटों का अन्तर क्यों अयनांश सायन और निरयण राशिचक्र के बीच का अन्तर है, जो हर वर्ष लगभग 50.3 विकला बढ़ता है। अयनांश, सूर्योदय की परिभाषा, स्थान और परम्पराओं के अन्तर से दो पंचांगों में कुछ मिनटों का भेद आ सकता है।
- अधिक मास और क्षय मास: चान्द्र पंचांग का ऋतुओं से तालमेल जब दो अमावस्याओं के बीच सूर्य राशि नहीं बदलता तब अधिक मास होता है; जब वह दो बार राशि बदलता है तब अत्यन्त दुर्लभ क्षय मास होता है। इन्हीं से चान्द्र मास ऋतुओं के साथ बने रहते हैं।
- योग और करण: पंचांग के चौथे और पाँचवें अंग योग सूर्य और चन्द्रमा के निरयण भोगांशों के योग से बनता है और करण तिथि का आधा भाग है। ये दोनों मिलकर पंचांग के पाँच अंग पूरे करते हैं।
- भद्रा (विष्टि करण): क्या है और क्यों देखी जाती है भद्रा पंचांग के अर्ध-तिथि खण्ड, करण, में से विष्टि करण का नाम है। यह एक चान्द्र मास में लगभग आठ बार आती है, और परम्परा चन्द्र राशि के अनुसार इसका वास तीन लोकों में से एक में मानती है।
- दीपावली की तिथि कैसे तय होती है दीपावली की लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में अमावस्या से तय होती है। जानिए अमावस्या दो संध्याओं में हो तो कौन-सा नियम लगता है और पंचांगों में अंतर क्यों होता है।
- नक्षत्र: 27 चान्द्र नक्षत्रों की जानकारी नक्षत्र निरयण राशिचक्र के 27 समान भाग हैं, प्रत्येक 13°20′ का। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें उस समय चन्द्रमा स्थित हो।
- तिथि: चान्द्र दिवस की पूरी जानकारी तिथि वह समय है जिसमें चन्द्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। 30 तिथियाँ मिलकर एक चान्द्र मास बनाती हैं, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बँटा होता है।
- विवाह मुहूर्त: शुभ विवाह तिथि कैसे चुनी जाती है विवाह के ग्यारह नक्षत्र, विवाह के लिए पारम्परिक रूप से वर्जित काल, और पंचांगों की विवाह-तिथि सूचियाँ अलग क्यों होती हैं।