आज का श्लोक गुरुवार, 14 मई 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 6.19
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā |
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥yogino yatacittasya yuñjato yogamātmanaḥ ||
सुनें और अभ्यास करें
कृत्रिम (मशीनी) आवाज़ — उच्चारण में त्रुटि हो सकती है; रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता दें।
कुंजियाँ (जब प्लेयर पर फ़ोकस हो): ← और → पिछली या अगली पंक्ति, स्पेस चलाएँ या रोकें।
यहाँ उच्चारण ऑडियो उपलब्ध नहीं है: इस पाठ की रिकॉर्डिंग अभी नहीं है और इस ब्राउज़र में संस्कृत या हिन्दी की आवाज़ नहीं है।
अर्थ
जैसे वायुरहित स्थान में रखा दीपक नहीं डगमगाता, वैसी ही ध्यान में लगे संयमी योगी के चित्त की स्थिति होती है।
As a lamp in a windless place does not flicker: that is the image of the disciplined mind of a yogi absorbed in meditation.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 13/05/2026 (बुध) अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे । श्रीमद्भगवद्गीता 2.11
- 12/05/2026 (मंगल) उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः । हितोपदेश, प्रस्ताविका 36
- 11/05/2026 (सोम) ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः । श्रीमद्भगवद्गीता 15.7
- 10/05/2026 (रवि) प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.27
- 09/05/2026 (शनि) कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । पारम्परिक प्रार्थना
- 08/05/2026 (शुक्र) मातृदेवो भव । तैत्तिरीयोपनिषद् 1.11.2
- 07/05/2026 (गुरु) मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । श्रीमद्भगवद्गीता 7.3
- 06/05/2026 (बुध) नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.23
- 05/05/2026 (मंगल) सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् । किरातार्जुनीयम् (भारवि) 2.30
- 04/05/2026 (सोम) यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । श्रीमद्भगवद्गीता 18.46
- 03/05/2026 (रवि) ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । श्रीमद्भगवद्गीता 4.24
- 02/05/2026 (शनि) सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.10
- 01/05/2026 (शुक्र) स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदं सर्वं तत्सत्यं स आत्मा । छान्दोग्योपनिषद् 6.8.7
- 30/04/2026 (गुरु) अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते । श्रीमद्भगवद्गीता 9.22
- 29/04/2026 (बुध) योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय । श्रीमद्भगवद्गीता 2.48
- 28/04/2026 (मंगल) अपि क्रियार्थं सुलभं समित्कुशं जलान्यपि स्नानविधिक्षमाणि ते । कुमारसम्भवम् (कालिदास) 5.33
- 27/04/2026 (सोम) यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति । ईशावास्योपनिषद् 6
- 26/04/2026 (रवि) ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः । श्रीमद्भगवद्गीता 5.10
- 25/04/2026 (शनि) आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम् । पारम्परिक प्रार्थना
- 24/04/2026 (शुक्र) इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् । ऋग्वेद 1.164.46
- 23/04/2026 (गुरु) अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते । श्रीमद्भगवद्गीता 10.8
- 22/04/2026 (बुध) या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी । श्रीमद्भगवद्गीता 2.69
- 21/04/2026 (मंगल) मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् । पारम्परिक सुभाषित
- 20/04/2026 (सोम) आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु । कठोपनिषद् 1.3.3
- 19/04/2026 (रवि) युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । श्रीमद्भगवद्गीता 6.17
- 18/04/2026 (शनि) मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । रामरक्षास्तोत्र (बुधकौशिक) 33
- 17/04/2026 (शुक्र) विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् । हितोपदेश, प्रस्ताविका 6
- 16/04/2026 (गुरु) यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः । श्रीमद्भगवद्गीता 12.15
- 15/04/2026 (बुध) यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.21
- 14/04/2026 (मंगल) त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । पारम्परिक प्रार्थना