आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 26 मई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

अमृतबिन्दु उपनिषद् 2

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः ।mana eva manuṣyāṇāṃ kāraṇaṃ bandhamokṣayoḥ |

बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं स्मृतम् ॥bandhāya viṣayāsaktaṃ muktyai nirviṣayaṃ smṛtam ||

अर्थ

मन ही मनुष्यों के बन्धन और मोक्ष का कारण है। विषयों में आसक्त मन बन्धन का और विषयों से मुक्त मन मोक्ष का कारण है।

The mind alone is the cause of bondage and freedom. Attached to sense objects it binds; free of them it liberates.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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