आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 11 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

कठोपनिषद् 1.3.14

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।uttiṣṭhata jāgrata prāpya varānnibodhata |

क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति ॥kṣurasya dhārā niśitā duratyayā durgaṃ pathastatkavayo vadanti ||

अर्थ

उठो, जागो और श्रेष्ठ गुरुओं के पास जाकर ज्ञान प्राप्त करो। ज्ञानी कहते हैं कि यह मार्ग छुरे की तेज़ धार के समान दुर्गम है।

Arise, awake, and learn by approaching the great teachers. The sages say the path is hard to tread, sharp as the edge of a razor.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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