आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 19 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 17.20

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे ।dātavyamiti yaddānaṃ dīyate'nupakāriṇe |

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम् ॥deśe kāle ca pātre ca taddānaṃ sāttvikaṃ smṛtam ||

अर्थ

“देना कर्तव्य है” इस भाव से, बदले की आशा के बिना, उचित स्थान, समय और योग्य पात्र को दिया गया दान सात्त्विक कहलाता है।

A gift given because giving is right, to one who cannot repay, at the proper place and time and to a worthy person, is called sattvic giving.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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