आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 22 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्वेताश्वतरोपनिषद् 6.11

एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा ।eko devaḥ sarvabhūteṣu gūḍhaḥ sarvavyāpī sarvabhūtāntarātmā |

कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च ॥karmādhyakṣaḥ sarvabhūtādhivāsaḥ sākṣī cetā kevalo nirguṇaśca ||

अर्थ

एक ही देव सब प्राणियों में छिपा है; वह सर्वव्यापी, सबका अन्तरात्मा, कर्मों का अधिष्ठाता, सबमें निवास करने वाला, साक्षी, चेतन, अद्वितीय और निर्गुण है।

The one God hidden in all beings, all-pervading, the inner self of all, presides over all action and dwells in all beings: the witness, pure consciousness, alone and beyond qualities.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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