आज का श्लोक

आज का श्लोक रविवार, 12 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

नीतिशतक (भर्तृहरि के नाम से प्रचलित)

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः ।ālasyaṃ hi manuṣyāṇāṃ śarīrastho mahān ripuḥ |

नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥nāstyudyamasamo bandhuḥ kṛtvā yaṃ nāvasīdati ||

अर्थ

आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है; परिश्रम के समान कोई मित्र नहीं, जिसे करने से मनुष्य दुःखी नहीं होता।

Laziness is a great enemy living within our own body; there is no friend like effort, with which one never comes to grief.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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